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Excerpt for खुन्नस by , available in its entirety at Smashwords

खुन्नस (चीन की लोककथा)



आलोक श्रीवास्तव

आदित्य श्रीवास्तव

आशा श्रीवास्तव

© Alok Srivastava, 2018

© Aditya Srivastava, 2018

© Asha Srivastava, 2018

प्रथम संस्करण: 2018

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खुन्नस



बहुत समय पहले की बात है। लुआनचुआन सियन (栾川县)1 में वांग नाम की एक विधवा अपने एकलौते लड़के मिंग-ली के साथ रहा करती थी। वे दोनों बहुत ही गरीबी में दिन गुजारा करते थे। एक दिन मिंग-ली जैसे ही सुबह सवेरे काम की तलाश में घर से बाहर निकला तो उसकी विधवा माँ ने उससे कहा ‘हम कल क्या खायेंगे, इस बात का मुझे जरा भी अंदाजा नहीं है!’

ईश्वर ने मुंह दिया है तो पेट भी भरेगा। मुझे कहीं न कहीं से कुछ पैसे मिल ही जायेंगे,” खुश होने की कोशिश करते हुए, लड़के ने जवाब दिया, हालांकि दिल ही दिल में वह आशंकित था कि वह किस दिशा में जाएगा।

सर्दियां हमेशा से ही मुश्किल होती आयी हैं: भारी बर्फबारी और बहुत ही तेज सर्द हवाएं सर्दियों के लिए आम बात है। वांग के घर ने सर्दियों को बुरी तरह से सहा था। घर की छत अंदर की ओर धंस गयी थी, भारी मात्रा में गिरने वाली बर्फ ने इसे झुका दिया था। इसके बाद आये एक तूफान ने एक दीवार को बाहर ढहा दिया था; पूरी रात कड़ाके की सर्द हवा के सामने असहाय पड़ा रहने से मिंग-ली को निमोनिया हो गया था। बीमारी के लम्बे दिनों में दवाओं के लिए अतिरिक्त पैसे खर्च हुए थे। उनकी सारी छोटी बचतें बहुत जल्द ही खत्म हो गयीं थीं, और जिस दुकान पर मिंग-ली काम किया करता था उसके मालिक ने किसी दूसरे लड़के को मिंग-ली की जगह पर नौकरी दे दी थी। आखिरकार, बीमारी के बाद जब वह बिस्तर से उठा तो कठिन श्रम करने के लिए वह बहुत ही कमजोर था और अड़ोस-पड़ोस के किसी भी गाँव में उसके लिए कोई काम मिल पाना मुश्किल जान पड़ता था। देर रात घर लौटने पर, वह कोशिश करता था कि हिम्मत न हारे, लेकिन उसका दिल दुःख की गहरी पीड़ा महसूस करता था कि वह कैसा अभागा लड़का है जो अपनी माँ को खाने और कपड़े की तंगी सहते हुए देखता है।

अगले दिन काम की तलाश में मिंग-ली के जाने के बाद उसकी विधवा मां ने कहा “ईश्वर इस नेक दिल लड़के को सुख-शांति दे! किसी माँ को इससे अच्छा लड़का शायद ही कभी मिला होगा। मैं उम्मीद करती हूँ कि वह सही कहता है, ईश्वर हमें खाना देगा। पिछले कुछ सप्ताहों से हालात कितने ज्यादा बदतर हो गये हैं; ऐसा जान पड़ता है मानो मेरा पेट किसी धनवान आदमी के दिमाग जितना ही खाली हो गया है। अरे, अब तो चूहों ने भी हमारी झोंपड़ी में आना छोड़ दिया है, और यहाँ बेचारी बिल्ली माओ के लिए कुछ भी नहीं है, जबकि बूढ़ा कुत्ता बाओ भूख से लगभग मरने-मरने को है।”

जिस समय बूढ़ी विधवा अपने और अपने पालतू जानवरों के दुःख को खुद से बड़बड़ा रही थी, उसकी टिप्पणियों के जवाब में एक कोने से—जहाँ ये दोनों भूखे जानवर आपस में सिमट कर दुबके हुए बैठे थे ताकि खुद को गर्म रख सकें—एक दयनीय म्याऊं की आवाज और एक जर्जर भौंकने की आवाज आयी।

इसके तुरंत बाद गेट पर तेज आवाज में एक दस्तक हुयी। विधवा वांग ने आवाज दी, “अंदर आ जाओ”। वह चकित हो गयी जब उसने देखा कि एक गंजा भिक्षु उसके दरवाजे पर खड़ा था।

यह सोचकर कि आगन्तुक खाने की तलाश में आया था, विधवा वांग ने कहा, “मुझे खेद है, लेकिन आपको देने के लिए हमारे पास कुछ नहीं है। बीते दो सप्ताहों से हम लोग बचा-खुचा खाना खाकर गुजारा कर रहे हैं और अब हम केवल उन यादों के सहारे जी रहे हैं जो हमें उस समय की याद दिलाती हैं जब मेरे लड़के के पिता जीवित थे और हम खुशहाल जिंदगी बिताया करते थे। हमारी बिल्ली बहुत तगड़ी हुआ करती थी इतनी कि वह छत पर नहीं चढ़ सकती थी। और अब उसे देखिये! आप देख सकते हैं, वह कितनी दुबली हो गयी है। नहीं, मुझे अफ़सोस है, भिक्षु महोदय, मैं आपकी मदद नहीं कर सकती हूँ परन्तु आप हमारे हालातों को देख सकते हैं।”

मैं दान मांगने के लिए नहीं आया था,” सपाट-चिकनी दाढ़ी वाले उस गंजे भिक्षु ने बूढ़ी विधवा की तरफ दया भरी दृष्टि डालते हुए कहा, “बल्कि मैं तो इसलिए आया था, ताकि मैं तुम्हारी मदद कर सकूं ...मैं तुम्हारी मदद करूंगा! देवताओं ने तुम्हारे निष्ठावान पुत्र की लम्बी प्रार्थनाओं को सुन लिया है। वे उसे सम्मानित करना चाहते हैं उन्होंने देखा है कि अपनी बीमारी के बाद से किस तरह से तुम्हारे लड़के ने तुम्हारी सेवा की है, और अब, जब वह पूरी तरह से टूट चुका है और काम करने में असमर्थ है, उन्होंने उसके गुण को पुरस्कृत करने का निर्णय लिया है। इसी प्रकार से तुम भी एक बहुत ही अच्छी माँ साबित हुयी हो और इसलिए अब तुम उस तोहफे को स्वीकार करो जिसे मैं तुम्हारे लिए लाया हूँ।”

भिक्षु के कहे शब्दों को सुन कर श्रीमती वांग को अपने कानों पर मुश्किल से ही यकीन हुआ और उसने हिचकिचाते हुए कहा, “क्या कहा आपने?.. आपके कहने का मतलब क्या है? कहीं आप हमारी बदकिस्मती का मजाक उड़ाने तो नहीं आये हैं?”

बिलकुल भी नहीं। यहाँ मेरे हाथ में एक सुनहरा भृंग है जिसमें ऐसी जादुई ताकत है जिसकी तुम कल्पना भी नहीं कर सकती हो। मैं इसे तुम्हें देने आया हूँ, ‘टूडी गोंग(土地)’2 देवता की तरफ से यह तोहफा संभालो।”

हाँ, इसे बेच कर एक अच्छी धनराशि मिल जाएगी,” जेवर को करीब से देखते हुए श्रीमती वांग ने बुदबुदाकर कहा, “और इससे हमें कई दिनों के खाने के लिए बाजरा मिल जायेगा। धन्यवाद, अच्छे भिक्षु, आपकी दयालुता के लिए आपका धन्यवाद।”

लेकिन ध्यान रखना, इस सुनहरे भृंग को तुम किसी भी कीमत पर मत बेचना, क्योंकि इसमें वह ताकत है जो पूरी जिन्दगी तुम्हारा पेट भर सकती है।”

चौंकाने वाले इन शब्दों को सुनकर विधवा मुंह बाए भिक्षु का चेहरा देखती रही और फिर बोली, “ओह? वाकई?”

हाँ, तुम्हें मुझ पर संदेह नहीं करना चाहिए, बल्कि अब मैं जो तुम्हें बताने जा रहा हूँ उसे तुम ध्यानपूर्वक सुनो। जब भी तुम्हें खाने की इच्छा हो, उस समय तुम्हें केवल इतना करना है कि तुम इस भृंग को ले जाकर एक केतली उबलते पानी में डाल देना और जो कुछ भी खाने की तुम्हें इच्छा हो उसका नाम लगातार लेती जाना। तीन मिनट बाद जब तुम अपने बर्तन के ढक्कन को हटाओगी तो तुम्हें तुम्हारा गर्मागर्म खाना तैयार मिलेगा और यह खाना इतने अच्छे ढंग से पका होगा कि शायद ही कभी तुमने इससे अच्छा पका हुआ खाना खाया होगा।”

क्या मैं इसे अभी आजमा सकती हूँ?” विधवा ने उत्सुकता से पूछा।

मेरे यहाँ से जाते ही तुम इसे आजमा सकती हो।”

भिक्षु के जाते ही विधवा ने दरवाजे को बंद किया, जाकर तेजी से आग जलाई और एक केतली में पानी भरकर उसे आग पर चढ़ाया, इसके बाद उसने भिक्षु के दिए सुनहरे भृंग को गर्म पानी में डाल दिया और इन शब्दों को लगातार कहने लगी:


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(Pages 1-7 show above.)